This article is published by The Legal Warning India and written by Advocate Uday Singh.
उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 24 क्या है? जमीन की सीमा विवाद में कैसे लें कानूनी कार्रवाई
उत्तर प्रदेश में जमीन से जुड़े विवाद केवल मालिकाना हक या दाखिल-खारिज तक सीमित नहीं होते। कई बार असली विवाद इस बात को लेकर होता है कि दो खेतों या दो गाटा नंबरों की वास्तविक सीमा कहां है, मेड़ किस जगह होनी चाहिए या पड़ोसी ने आपकी जमीन का कुछ हिस्सा अपने कब्जे में कर लिया है।
ऐसी स्थिति में उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धारा 24 महत्वपूर्ण हो सकती है। यह प्रावधान मुख्य रूप से भूमि की सीमा से जुड़े विवादों के निस्तारण से संबंधित है।
धारा 24 UP Revenue Code क्या है?
सरल भाषा में समझें तो यदि दो या अधिक जमीनों के बीच सीमा को लेकर विवाद है, तो संबंधित व्यक्ति Sub-Divisional Officer (SDO) के समक्ष धारा 24 के तहत सीमा विवाद के निस्तारण के लिए आवेदन कर सकता है।
इस प्रकार की कार्यवाही में संबंधित राजस्व रिकॉर्ड, नक्शे और मौके की स्थिति महत्वपूर्ण हो सकती है। कानून में उपलब्ध सर्वे मैप या लागू संशोधित नक्शे के आधार पर सीमा निर्धारित करने की व्यवस्था है। जहां उससे सीमा निर्धारित करना संभव न हो, वहां वास्तविक कब्जे को भी देखा जा सकता है।
किन मामलों में धारा 24 उपयोगी हो सकती है?
- पड़ोसी ने खेत की मेड़ आगे बढ़ा दी हो।
- दो गाटा नंबरों के बीच सीमा को लेकर विवाद हो।
- राजस्व नक्शे और मौके की स्थिति अलग दिखाई दे रही हो।
- पड़ोसी आपकी जमीन के हिस्से में निर्माण कर रहा हो।
- खेत की वास्तविक सीमा को लेकर विवाद हो।
- किसी व्यक्ति ने सीमा चिन्ह या मेड़ को बदल दिया हो।
- पैमाइश या सीमांकन को लेकर विवाद हो।
- पुराने नक्शे और वर्तमान कब्जे में अंतर हो।
धारा 24 में आवेदन किसके सामने किया जाता है?
धारा 24 के तहत सीमा विवाद के निस्तारण के लिए संबंधित क्षेत्र के Sub-Divisional Officer (SDO) के समक्ष कार्यवाही की जाती है। स्थानीय राजस्व क्षेत्र के अनुसार सक्षम अधिकारी का निर्धारण होता है।
SDO सीमा विवाद में किन चीजों को देख सकता है?
मामले की परिस्थितियों के अनुसार राजस्व नक्शा, सर्वे रिकॉर्ड, खतौनी, गाटा विवरण और मौके की स्थिति महत्वपूर्ण हो सकती है।
यदि उपलब्ध नक्शे से सीमा स्पष्ट हो जाती है तो उसे प्राथमिक आधार बनाया जा सकता है। यदि नक्शे से सीमा निर्धारित करना संभव नहीं है, तो वास्तविक कब्जे की स्थिति भी महत्वपूर्ण हो सकती है।
राजस्व नक्शा क्यों महत्वपूर्ण है?
जमीन की सीमा के विवाद में केवल मौखिक दावा पर्याप्त नहीं होता। संबंधित गाटा संख्या, खसरा, खतौनी, राजस्व नक्शा और उपलब्ध पुराने रिकॉर्ड को देखकर वास्तविक स्थिति समझना जरूरी हो सकता है।
अगर यह पता न चले कि जमीन पर कब्जा किसका है तो क्या होगा?
धारा 24 में ऐसी स्थिति के लिए भी व्यवस्था है। यदि सक्षम अधिकारी के सामने यह स्पष्ट न हो कि विवादित भूमि पर वास्तविक कब्जा किस पक्ष का है, तो summary inquiry के माध्यम से यह देखा जा सकता है कि किस व्यक्ति का कब्जा पाने का बेहतर अधिकार है।
इसलिए सीमा विवाद में केवल यह कहना कि “यह जमीन मेरी है” पर्याप्त नहीं हो सकता। संबंधित दस्तावेज और राजस्व रिकॉर्ड महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
अगर किसी व्यक्ति को गलत तरीके से जमीन से हटा दिया गया हो तो?
यदि जांच में यह सामने आता है कि किसी व्यक्ति को गलत तरीके से कब्जे से हटाया गया था, तो कानून में उसे कब्जे में वापस रखने से संबंधित व्यवस्था भी मौजूद है। इसके बाद सीमा का निर्धारण किया जा सकता है।
धारा 24 की कार्यवाही कितने समय में पूरी होनी चाहिए?
धारा 24 में यह प्रावधान है कि कार्यवाही को जहां तक संभव हो, आवेदन की तारीख से तीन महीने के भीतर पूरा किया जाना चाहिए। हालांकि वास्तविक अवधि मामले की परिस्थितियों और कार्यवाही पर निर्भर कर सकती है।
धारा 24 के आदेश के खिलाफ अपील कहां होती है?
यदि कोई व्यक्ति SDO के आदेश से प्रभावित है, तो कानून में Commissioner के समक्ष appeal का प्रावधान है। धारा 24 के अनुसार appeal के लिए सामान्यतः आदेश की तारीख से 30 दिनों की अवधि महत्वपूर्ण है।
इसलिए यदि आपके खिलाफ आदेश हो चुका है तो आदेश की certified copy प्राप्त करके applicable remedy और limitation की तुरंत जांच करना महत्वपूर्ण हो सकता है।
धारा 24 के आवेदन में कौन-कौन सी जानकारी महत्वपूर्ण है?
धारा 24 से संबंधित नियमों के अनुसार आवेदन में जमीन की पहचान से जुड़ी जानकारी महत्वपूर्ण होती है। इसमें संबंधित गाटा संख्या, खातेदार का नाम, गांव, तहसील और वर्तमान खतौनी आदि का विवरण शामिल हो सकता है।
तैयार रखने वाले महत्वपूर्ण दस्तावेज
- वर्तमान खतौनी की प्रति
- गाटा/खसरा संख्या का विवरण
- राजस्व नक्शा या सजरा
- पुराने राजस्व रिकॉर्ड
- पूर्व पैमाइश या सीमांकन रिपोर्ट
- पूर्व राजस्व आदेश
- रजिस्ट्री/बैनामा की प्रति, जहां प्रासंगिक हो
- विरासत या बंटवारे से जुड़े दस्तावेज
- अन्य संबंधित दस्तावेज
यदि आपकी जमीन सरकारी जमीन से लगी हुई है तो क्या होगा?
यदि विवादित गाटा की सीमा से ग्राम पंचायत या राज्य सरकार की भूमि लगी हुई है, तो संबंधित सरकारी पक्ष या ग्राम पंचायत को कार्यवाही में शामिल किए जाने की आवश्यकता हो सकती है। यह मामला भूमि की श्रेणी और रिकॉर्ड पर निर्भर करता है।
धारा 24 और दाखिल खारिज में क्या अंतर है?
यह अंतर समझना बहुत जरूरी है।
धारा 24: मुख्य रूप से जमीन की सीमा और boundary dispute से संबंधित है।
धारा 35: उत्तराधिकार या हस्तांतरण से जुड़े mutation यानी दाखिल-खारिज मामलों से संबंधित है।
इसलिए यदि समस्या यह है कि “पड़ोसी ने मेरी जमीन की सीमा आगे कर ली है”, तो मामला boundary dispute का हो सकता है। वहीं यदि समस्या यह है कि “दूसरे व्यक्ति का नाम खतौनी में चढ़ाया जा रहा है”, तो mutation से संबंधित प्रावधान देखना होगा।
धारा 24 और धारा 67 में क्या अंतर है?
धारा 24 जमीन की सीमा के विवाद से संबंधित है, जबकि धारा 67 सरकारी या ग्राम पंचायत की भूमि पर अवैध कब्जे से संबंधित बेदखली की कार्यवाही से जुड़ी है।
इसलिए दोनों धाराओं को एक जैसा समझना सही नहीं है। किसी मामले में कौन-सा प्रावधान लागू होगा, यह जमीन के रिकॉर्ड और वास्तविक विवाद पर निर्भर करता है।
क्या धारा 24 से मालिकाना हक का अंतिम फैसला हो जाता है?
धारा 24 मुख्य रूप से boundary dispute के निस्तारण के लिए है। यदि विवाद वास्तव में मालिकाना हक, title, sale deed, विरासत या हिस्सेदारी का गंभीर विवाद है, तो केवल boundary proceeding से हर प्रकार का ownership dispute अंतिम रूप से समाप्त हो जाए, ऐसा जरूरी नहीं है।
ऐसी स्थिति में उपलब्ध दस्तावेज देखकर यह समझना जरूरी हो सकता है कि राजस्व कार्यवाही के अलावा किसी अन्य कानूनी remedy की आवश्यकता है या नहीं।
जमीन की सीमा विवाद में लोग कौन-सी गलतियां करते हैं?
1. केवल मौखिक शिकायत करते रहना
भूमि विवाद में लिखित रिकॉर्ड और दस्तावेज महत्वपूर्ण होते हैं। इसलिए अपनी शिकायत और उपलब्ध दस्तावेजों को व्यवस्थित रखना जरूरी हो सकता है।
2. गाटा संख्या गलत लिख देना
गाटा संख्या या भूमि का विवरण गलत होने पर पूरी कार्यवाही प्रभावित हो सकती है। आवेदन से पहले खतौनी और संबंधित रिकॉर्ड की जांच करें।
3. पुराने नक्शे की जांच न करना
Boundary dispute में राजस्व नक्शा महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उपलब्ध नक्शे और रिकॉर्ड की जांच करना उपयोगी हो सकता है।
4. मौके की स्थिति को रिकॉर्ड से मिलान न करना
यदि मौके की स्थिति और राजस्व रिकॉर्ड में अंतर है, तो इस अंतर को दस्तावेजों के साथ स्पष्ट करना महत्वपूर्ण हो सकता है।
5. आदेश के बाद appeal की समय सीमा भूल जाना
यदि SDO का आदेश आपके विरुद्ध है, तो appeal की वैधानिक समय सीमा को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। धारा 24 में Commissioner के समक्ष appeal का प्रावधान है।
धारा 24 में Advocate की सहायता कब उपयोगी हो सकती है?
यदि मामला केवल साधारण सीमा विवाद न होकर पैतृक जमीन, सहखातेदारी, पुराने बंटवारे, विवादित रजिस्ट्री, कब्जे, नक्शे और खतौनी के अंतर या पहले से लंबित मुकदमे से जुड़ा है, तो दस्तावेजों की कानूनी समीक्षा उपयोगी हो सकती है।
अधिवक्ता से परामर्श लेते समय केवल वर्तमान खतौनी ही नहीं, बल्कि गाटा संख्या, राजस्व नक्शा, पुराने रिकॉर्ड, रजिस्ट्री/बैनामा और पूर्व आदेश भी उपलब्ध कराना मामले को समझने में मदद कर सकता है।
अगर पड़ोसी आपकी जमीन में निर्माण कर रहा है तो क्या करें?
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि विवाद वास्तव में boundary, possession या ownership/title का है। संबंधित राजस्व रिकॉर्ड और मौके की स्थिति की जांच कराकर उपयुक्त कानूनी प्रक्रिया की जानकारी लेना महत्वपूर्ण हो सकता है।
केवल स्वयं जाकर विवाद बढ़ाने या बलपूर्वक कब्जा हटाने की कोशिश करने के बजाय सक्षम प्राधिकारी की कानूनी प्रक्रिया का सहारा लेना अधिक उचित हो सकता है।
Meja Tehsil में धारा 24 का मामला हो तो क्या ध्यान रखें?
यदि आपकी जमीन Meja Tehsil, Prayagraj क्षेत्र में है और पड़ोसी या किसी अन्य व्यक्ति के साथ गाटा सीमा, मेड़ या कब्जे को लेकर विवाद है, तो सबसे पहले संबंधित गाटा संख्या और राजस्व रिकॉर्ड की जांच करें।
Meja Tehsil land dispute, Meja boundary dispute, Meja जमीन की पैमाइश, Meja Revenue Court और Meja Tehsil property dispute जैसे मामलों में स्थानीय रिकॉर्ड और मामले के तथ्य के अनुसार उचित प्रक्रिया अलग हो सकती है।
इसलिए किसी भी आवेदन से पहले दस्तावेजों की समीक्षा कराना उपयोगी हो सकता है, विशेषकर तब जब पहले से कोई आदेश, मुकदमा या विवादित रजिस्ट्री मौजूद हो।
निष्कर्ष
उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 24 जमीन की सीमा से जुड़े विवादों के लिए महत्वपूर्ण राजस्व प्रावधान है। यदि दो गाटों की सीमा, खेत की मेड़, राजस्व नक्शे और वास्तविक कब्जे को लेकर विवाद है, तो मामले के रिकॉर्ड के आधार पर धारा 24 की कार्यवाही पर विचार किया जा सकता है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सही गाटा संख्या, खतौनी, राजस्व नक्शा और उपलब्ध दस्तावेज के साथ मामले की स्थिति समझी जाए। यदि SDO का आदेश पारित हो चुका है, तो appeal की समय सीमा पर भी तुरंत ध्यान देना चाहिए।
Read Also
Information is based on the Uttar Pradesh Revenue Code, 2006, Uttar Pradesh Revenue Code Rules, 2016 and publicly available government sources.
Disclaimer: This article is for general legal information and awareness purposes only. It does not constitute legal advice or solicitation. Communication is purely informational, in compliance with Bar Council of India Rule 36.





















