This article is published by The Legal Warning India and written by Advocate Uday Singh.
सोनभद्र लोढ़ी टोल प्लाज़ा मामला: महिला अधिवक्ता से मारपीट पर दर्ज FIR का कानूनी विश्लेषण
मामले की पृष्ठभूमि (FIR के आधार पर)
दिनांक 01 फरवरी 2026 को उत्तर प्रदेश के जनपद सोनभद्र स्थित लोढ़ी टोल प्लाज़ा पर एक गंभीर आपराधिक घटना घटित हुई, जिसके संबंध में कोतवाली रॉबर्ट्सगंज में FIR संख्या 0087/2026 दर्ज की गई।
FIR के अनुसार, पीड़िता एक महिला अधिवक्ता हैं, जो अपने साथियों के साथ कार द्वारा यात्रा कर रही थीं। टोल प्लाज़ा पर बैरियर लेन में जाम की स्थिति उत्पन्न हुई, जिस पर टोल कर्मचारियों से पूछताछ की गई।
घटना का विवरण (जैसा FIR में दर्ज है)
FIR में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि बातचीत के दौरान टोल कर्मियों द्वारा:
- अशब्द भाषा (गाली-गलौज) का प्रयोग किया गया
- विरोध करने पर लाठी-डंडा और रॉड लेकर हमला किया गया
- पीड़िता और उनके साथियों के साथ मारपीट की गई
- पीड़िता के साथ धक्का-मुक्की और अभद्र व्यवहार हुआ
- जान से मारने की धमकी दी गई
FIR में यह भी उल्लेख है कि घटना इतनी गंभीर थी कि टोल प्लाज़ा पर अफरा-तफरी मच गई और कई वाहन रुक गए।
नामजद और अज्ञात आरोपी
FIR के अनुसार:
- दो व्यक्तियों को नामजद आरोपी बनाया गया है
- इसके अतिरिक्त 7-8 अज्ञात टोल कर्मियों को भी आरोपी बताया गया है
यह दर्शाता है कि मामला केवल व्यक्तिगत विवाद नहीं बल्कि सामूहिक हिंसा का है।
लागू धाराएँ – BNS (भारतीय न्याय संहिता, 2023)
FIR में निम्नलिखित धाराएँ लगाई गई हैं:
- BNS 109(1) – हत्या का प्रयास
- BNS 115(2) – जानबूझकर चोट पहुँचाना
- BNS 191(2) – दंगा / सामूहिक हिंसा
- BNS 351(3) – आपराधिक धमकी
- BNS 352 – हमला या आपराधिक बल प्रयोग
- BNS 74 – महिला की गरिमा भंग करने का अपराध
IPC से तुलना (Legal Context)
यदि यह घटना IPC के अंतर्गत होती, तो निम्न धाराएँ लागू होतीं:
- IPC 307 – हत्या का प्रयास
- IPC 323/325 – मारपीट
- IPC 147/149 – दंगा
- IPC 506 – आपराधिक धमकी
- IPC 354 – महिला की मर्यादा भंग
यह स्पष्ट करता है कि FIR में गंभीर और गैर-जमानती अपराध दर्ज किए गए हैं।
महिला अधिवक्ता होने का कानूनी महत्व
यह मामला इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि पीड़िता:
- एक महिला हैं
- एक अधिवक्ता हैं
- सार्वजनिक स्थान पर कानून के तहत प्रश्न पूछ रही थीं
महिला अधिवक्ता के साथ इस प्रकार का व्यवहार न केवल आपराधिक कृत्य है, बल्कि न्याय प्रणाली की गरिमा पर भी आघात है।
पुलिस जांच की स्थिति
FIR के अनुसार:
- जांच अधिकारी की नियुक्ति की जा चुकी है
- CCTV फुटेज, मेडिकल रिपोर्ट और गवाहों के बयान जांच का हिस्सा हैं
- मामला विवेचना में है
कानूनी प्रश्न जो आगे उठ सकते हैं
- क्या टोल प्रबंधन की लापरवाही सामने आएगी?
- क्या टोल एजेंसी पर भी जवाबदेही तय होगी?
- क्या पीड़िता को मुआवज़ा मिलेगा?
- क्या यह मामला फास्ट-ट्रैक में चलेगा?
निष्कर्ष
लोढ़ी टोल प्लाज़ा की यह घटना केवल एक झगड़ा नहीं, बल्कि कानून व्यवस्था, महिला सुरक्षा और नागरिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर मामला है।
FIR में दर्ज धाराएँ यह दर्शाती हैं कि पुलिस ने प्रारंभिक स्तर पर मामले को गंभीरता से लिया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच निष्पक्ष, त्वरित और प्रभावी होती है या नहीं।





















