This article is published by The Legal Warning India and written by Advocate Uday Singh.
सरकारी विभाग में “अंदरूनी सेटिंग” का दावा कर पैसा लिया गया – कानूनी सच्चाई क्या है?
कई लोग सरकारी नौकरी की चाह में ऐसे व्यक्तियों के जाल में फँस जाते हैं जो यह दावा करते हैं कि
“विभाग के अंदर सेटिंग है”, “ऊपर तक पहचान है”, “फाइल अंदर से निकल जाएगी”।
पैसा लेने के बाद न नौकरी मिलती है, न पैसा वापस आता है — और पीड़ित यह सोचकर चुप रह जाता है कि
“कहीं खुद ही गलत न साबित हो जाऊँ”।
यह लेख साफ़ करता है कि ऐसे मामलों में कानून क्या कहता है और पीड़ित के पास क्या कानूनी रास्ते हैं।
जानकारी भारतीय कानून और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध न्यायिक सिद्धांतों पर आधारित है।
“अंदरूनी सेटिंग” का दावा – कितना सच, कितना झूठ?
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि:
- सरकारी नौकरी की प्रक्रिया कानून से तय होती है
- कोई भी व्यक्ति निजी तौर पर नियुक्ति नहीं करा सकता
- “सेटिंग” का दावा अक्सर ठगी का तरीका होता है
सरकारी विभाग में अंदरूनी सेटिंग का दावा करना खुद में एक लाल झंडी (Red Flag) है।
क्या यह सिर्फ धोखाधड़ी है या गंभीर आपराधिक अपराध?
अगर व्यक्ति ने:
- झूठा प्रभाव (influence) दिखाया
- सरकारी पद या संपर्क का गलत दावा किया
- इसी आधार पर पैसा लिया
तो यह मामला केवल “उधार” या “समझौता” नहीं रहता, बल्कि आपराधिक धोखाधड़ी की श्रेणी में आता है।
सबसे आम पैटर्न जो ऐसे मामलों में दिखता है
- पहले भरोसा बनाया जाता है
- फिर “फाइल अंदर चली गई है” कहा जाता है
- बार-बार तारीख टाली जाती है
- अंत में संपर्क कम या बंद कर दिया जाता है
कई मामलों में बाद में यह भी कहा जाता है कि “refund कर देंगे”, लेकिन पैसा कभी नहीं आता।
WhatsApp / Telegram Scam से इसका क्या संबंध है?
आजकल “अंदरूनी सेटिंग” का दावा सिर्फ आमने-सामने नहीं, बल्कि
WhatsApp और Telegram के ज़रिए भी किया जा रहा है।
ऐसे online job scams को विस्तार से समझने के लिए यह लेख पढ़ना उपयोगी होगा:
WhatsApp / Telegram पर सरकारी नौकरी दिलाने वाला Scam – Legal Action कैसे लें?
क्या ऐसे मामले में FIR हो सकती है?
हाँ।
अगर यह साबित किया जा सके कि:
- नौकरी दिलाने की वास्तविक क्षमता नहीं थी
- सिर्फ पैसा लेने के लिए झूठा दावा किया गया
- सरकारी तंत्र का नाम लेकर विश्वास तोड़ा गया
तो FIR दर्ज की जा सकती है, भले ही आरोपी “सेटिंग” की बातें करता रहा हो।
सबूत क्या-क्या काम आते हैं?
- WhatsApp / Call रिकॉर्ड
- Payment receipts / bank entries
- झूठे वादों के messages
इनसे आरोपी की नीयत (intention) साबित करने में मदद मिलती है।
पीड़ित सबसे बड़ी गलती क्या करता है?
- “सेटिंग” के डर से शिकायत न करना
- लंबे समय तक इंतज़ार करना
- मौखिक भरोसे पर ही टिके रहना
कानून डरने वालों के लिए नहीं, सच बताने वालों के लिए काम करता है।
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निष्कर्ष
सरकारी विभाग में “अंदरूनी सेटिंग” का दावा कर पैसा लेना कानूनन अपराध है।
ऐसे दावों से डरकर चुप रहना आरोपी को मजबूत बनाता है।
समय पर कानूनी कदम उठाना ही एकमात्र सुरक्षित रास्ता है।
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Disclaimer: This article is for general legal information and awareness purposes only. It does not constitute legal advice or solicitation. Communication is purely informational, in compliance with Bar Council of India Rule 36.





















