Police Complaint Format India (Hindi)
यह लेख The Legal Warning India द्वारा प्रकाशित किया गया है तथा Advocate Uday Singh द्वारा लिखा गया है।
पुलिस शिकायत (Police Complaint) क्या होती है?
जब किसी व्यक्ति के साथ धोखाधड़ी, धमकी, मारपीट, साइबर अपराध, उत्पीड़न या कोई भी आपराधिक कृत्य होता है, तो वह व्यक्ति पुलिस को लिखित रूप में जो सूचना देता है, उसे पुलिस शिकायत (Police Complaint) कहा जाता है।
Police Complaint, FIR (First Information Report) का आधार बनती है।
Police Complaint और FIR में अंतर
| Police Complaint | FIR |
|---|---|
| साधारण लिखित शिकायत | कानूनी दस्तावेज |
| किसी भी अपराध के लिए | संज्ञेय अपराधों के लिए |
| पुलिस जांच का अनुरोध | पुलिस को जांच का अधिकार |
👉 विस्तार से जानने के लिए पढ़ें:
FIR under Section 173 BNSS Explained
Police Complaint कब लिखनी चाहिए?
- ऑनलाइन ठगी / Cyber Fraud
- धमकी (Threat / Criminal Intimidation)
- मारपीट या हमला
- महिला उत्पीड़न
- Cheque Bounce / Financial Fraud
- सोशल मीडिया से जुड़ा अपराध
📌 संबंधित लेख:
Social Media Legal Issues in India
Police Complaint Format (Hindi)
सेवा में,
थाना प्रभारी,
__________ थाना,
__________ जिला, (राज्य)
विषय: पुलिस शिकायत हेतु प्रार्थना पत्र।
महोदय,
सविनय निवेदन है कि मैं __________ पुत्र/पुत्री __________,
निवासी __________ हूँ।
मैं आपको यह सूचित करना चाहता/चाहती हूँ कि दिनांक __________ को
मेरे साथ निम्नलिखित घटना घटित हुई:
(यहाँ घटना का पूरा विवरण तिथि, समय, स्थान सहित लिखें)
उक्त कृत्य भारतीय कानून के अंतर्गत दंडनीय अपराध है।
अतः आपसे निवेदन है कि मेरी शिकायत दर्ज कर आवश्यक कानूनी कार्यवाही
करने की कृपा करें।
संलग्न:
1. पहचान पत्र की प्रति
2. साक्ष्य (यदि कोई हो)
दिनांक:
स्थान:
भवदीय,
नाम:
मोबाइल नंबर:
हस्ताक्षर:
Online Police Complaint कैसे करें?
यदि अपराध साइबर से संबंधित है, तो आप:
- Cyber Crime Helpline: 1930
- Website: https://cybercrime.gov.in
👉 यह भी पढ़ें:
How to File FIR for Online Offences
अगर पुलिस शिकायत दर्ज न करे तो क्या करें?
- SP / DCP को लिखित शिकायत
- Judicial Magistrate के समक्ष आवेदन (Section 173 BNSS)
- High Court में Writ Petition
📌 संबंधित केस एनालिसिस:
Difference Between Civil Recovery and Criminal Case
कानूनी सलाह क्यों आवश्यक है?
गलत तरीके से लिखी गई शिकायत अक्सर कमजोर FIR बन जाती है,
जिससे केस कमजोर हो सकता है। इसलिए अनुभवी अधिवक्ता की सहायता लेना
हमेशा लाभदायक होता है।
You can request legal guidance.
Get general legal information and consultation support for your issue.
Disclaimer:
यह लेख केवल सामान्य कानूनी जानकारी एवं जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है।
यह किसी प्रकार की कानूनी राय या विज्ञापन नहीं है।
Written by:
Uday Singh, Advocate
Practicing Advocate at High Court and District Courts
Antarrashtriya Manavadhikar Association – Prabhari







