This article is published by The Legal Warning India and written by Advocate Uday Singh.
COMPANY द्वारा PF और ESI जमा न करने पर कानूनी नोटिस – पूरा कानूनी समाधान
परिचय: वेतन से PF–ESI कटना लेकिन जमा न होना – गंभीर कानूनी उल्लंघन
अक्सर कर्मचारी यह पाते हैं कि उनकी सैलरी स्लिप में PF और ESI की राशि कट रही है, लेकिन वही राशि उनके UAN या ESI अकाउंट में जमा नहीं की जा रही। यह केवल कंपनी की आंतरिक समस्या नहीं, बल्कि कानूनी और वैधानिक अपराध है।
PF और ESI कर्मचारी की सामाजिक सुरक्षा, मेडिकल सुविधा और भविष्य की बचत से सीधे जुड़े होते हैं। इनका जमा न होना कर्मचारी के अधिकारों का उल्लंघन है।
PF और ESI जमा करना नियोक्ता की कानूनी जिम्मेदारी
भारतीय श्रम कानूनों के तहत नियोक्ता की जिम्मेदारी होती है कि:
- कर्मचारी के वेतन से PF और ESI काटे
- नियोक्ता का अंश (Employer Contribution) जोड़े
- निर्धारित समय-सीमा में संबंधित विभाग में जमा करे
कटौती करने के बाद राशि जमा न करना कानूनी विश्वासघात (Breach of Trust) और दंडनीय अपराध माना जाता है।
PF और ESI जमा न होने की आम स्थितियाँ
- कंपनी की आर्थिक स्थिति खराब होना
- जानबूझकर कानून की अनदेखी
- गलत या फर्जी UAN नंबर
- कर्मचारी का इस्तीफा या टर्मिनेशन
- कंपनी का बंद हो जाना
कारण कोई भी हो, कानून में नियोक्ता की जिम्मेदारी समाप्त नहीं होती।
क्या नियोक्ता को कानूनी नोटिस भेजना जरूरी है?
कर्मचारी सीधे PF या ESI विभाग में शिकायत कर सकता है, लेकिन नियोक्ता को कानूनी नोटिस भेजना सबसे प्रभावी पहला कदम माना जाता है।
कानूनी नोटिस से:
- कानूनी उल्लंघन लिखित रूप में दर्ज होता है
- नियोक्ता पर दबाव बनता है
- भविष्य की कानूनी कार्रवाई का आधार बनता है
- अक्सर मामला नोटिस स्टेज पर ही सुलझ जाता है
यह समस्या अन्य रोजगार विवादों से कैसे जुड़ी है?
PF और ESI जमा न होना अक्सर अन्य रोजगार विवादों के साथ जुड़ा होता है, जैसे:
- मुकदमा दायर करने से पहले कानूनी नोटिस
- गलत तरीके से नौकरी से निकालना
- फुल एंड फाइनल सेटलमेंट रोका जाना
अक्सर वही नियोक्ता PF–ESI नहीं जमा करते हैं जो अन्य वैधानिक देनदारियाँ भी रोकते हैं।
PF और ESI न जमा करने पर कानूनी नोटिस में क्या होना चाहिए?
- कर्मचारी का नाम और सेवा अवधि
- सैलरी स्लिप में PF/ESI कटौती का विवरण
- कितने महीनों का बकाया
- कानूनी उल्लंघन का उल्लेख
- तुरंत राशि जमा करने की मांग
- कानूनी कार्रवाई की चेतावनी
गलत या अधूरा नोटिस कर्मचारी की स्थिति कमजोर कर सकता है।
यदि नियोक्ता फिर भी PF और ESI जमा न करे तो क्या करें?
कानूनी नोटिस के बाद भी यदि नियोक्ता कार्रवाई नहीं करता, तो कर्मचारी:
- PF कमिश्नर या ESI ऑफिस में शिकायत
- श्रम विभाग में मामला
- रिकवरी और पेनल्टी की मांग
- आवश्यक होने पर आपराधिक कार्रवाई
प्राधिकरणों के पास बकाया राशि ब्याज सहित वसूलने का अधिकार होता है।
निष्कर्ष: PF और ESI कर्मचारी का अधिकार है, नियोक्ता की मर्जी नहीं
PF और ESI कोई बोनस नहीं, बल्कि कर्मचारी का कानूनी अधिकार है। वेतन से कटौती करने के बाद जमा न करना गंभीर अपराध है।
समय पर कानूनी नोटिस और सही कानूनी रणनीति अपनाकर कर्मचारी अपने अधिकारों की रक्षा कर सकता है।





















