धारा 116 अंश निर्धारण / बटवारा – जमीन का हिस्सा कैसे तय होता है? (UP Revenue Code Complete Guide)
This article is published by The Legal Warning India and written by Advocate Uday Singh.
गांव और कृषि भूमि से जुड़े विवादों में सबसे ज्यादा पूछे जाने वाले सवालों में से एक है:
“हमारी संयुक्त जमीन है, लेकिन हिस्सा तय नहीं है – क्या करें?”
या फिर:
- भाई जमीन का पूरा उपयोग कर रहा है
- नाम खतौनी में है, लेकिन हिस्सा साफ नहीं है
- बटवारा नहीं हुआ, झगड़ा बढ़ रहा है
ऐसी स्थिति में लागू होती है धारा 116 (अंश निर्धारण / बटवारा) – जो उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता का एक महत्वपूर्ण प्रावधान है।
इस लेख में हम विस्तार से समझेंगे:
- धारा 116 क्या है?
- अंश निर्धारण कैसे होता है?
- बटवारा (Partition) की पूरी प्रक्रिया
- तहसील स्तर पर केस कैसे चलता है?
- गलतियाँ जो केस बिगाड़ देती हैं
धारा 116 क्या है? (सरल भाषा में)
धारा 116 के तहत संयुक्त भूमि में प्रत्येक सह-स्वामी (co-owner) का हिस्सा तय (अंश निर्धारण) किया जाता है।
इसके बाद जमीन का बटवारा (Partition) किया जाता है ताकि हर व्यक्ति को उसका अलग हिस्सा मिल सके।
कब जरूरत पड़ती है अंश निर्धारण की?
- जब जमीन संयुक्त हो और हिस्से तय न हों
- जब सह-स्वामी आपस में विवाद कर रहे हों
- जब कोई एक व्यक्ति पूरी जमीन पर कब्जा कर ले
- जब अलग-अलग हिस्से पर खेती करनी हो
अंश निर्धारण और बटवारा में अंतर
- अंश निर्धारण: किसका कितना हिस्सा है – यह तय करना
- बटवारा: जमीन को physically बांटना
पूरी प्रक्रिया (Step-by-Step)
Step 1 – आवेदन (Application)
तहसीलदार / राजस्व न्यायालय में अंश निर्धारण और बटवारा के लिए आवेदन दिया जाता है।
Step 2 – नोटिस जारी
सभी सह-स्वामियों को नोटिस भेजा जाता है।
Step 3 – रिकॉर्ड जांच
खतौनी, खसरा, रजिस्ट्री आदि की जांच होती है।
Step 4 – अंश निर्धारण
किसका कितना हिस्सा है – यह तय किया जाता है।
Step 5 – नक्शा और सीमांकन
लेखपाल द्वारा जमीन की नाप कराई जाती है।
Step 6 – बटवारा आदेश
प्रत्येक व्यक्ति को अलग-अलग जमीन का हिस्सा दिया जाता है।
क्या जबरन कब्जा रोक सकते हैं?
हाँ, अगर कोई सह-स्वामी पूरा कब्जा कर लेता है, तो आप:
- बटवारा केस फाइल कर सकते हैं
- इंजंक्शन (Stay) ले सकते हैं
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अगर बटवारा आदेश के बाद भी कब्जा न मिले?
तब execution प्रक्रिया अपनानी पड़ती है:
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Common Mistakes (जो लोग करते हैं)
- बिना दस्तावेज केस फाइल करना
- पुराने रिकॉर्ड अपडेट न करना
- देरी करना
- केवल मौखिक समझौते पर भरोसा करना
FAQs
Q. क्या बिना बटवारे के कोई पूरा कब्जा कर सकता है?
नहीं, हर co-owner का बराबर अधिकार होता है।
Q. बटवारा कितना समय लेता है?
केस की जटिलता और विवाद पर निर्भर करता है।
Q. क्या तहसील स्तर पर बटवारा हो सकता है?
हाँ, राजस्व न्यायालय में होता है।
यह लेख केवल सामान्य कानूनी जानकारी और जागरूकता के उद्देश्य से है। यह किसी प्रकार की कानूनी सलाह या सॉलिसिटेशन नहीं है। यह Bar Council of India Rule 36 के अनुरूप है।





















