This article is published by The Legal Warning India and written by Advocate Uday Singh.
धारा 67 उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता: ग्राम समाज की जमीन पर कब्जा, नोटिस और बेदखली की कानूनी प्रक्रिया
उत्तर प्रदेश में जमीन और राजस्व विवादों से जुड़े मामलों में कई लोगों को अचानक तहसील या राजस्व अधिकारियों की ओर से नोटिस मिल जाता है। नोटिस में आरोप हो सकता है कि व्यक्ति ने ग्राम पंचायत/ग्राम सभा की संपत्ति या संबंधित भूमि पर गलत तरीके से कब्जा किया है।
ऐसी स्थिति में सबसे ज्यादा पूछा जाने वाला सवाल है:
“धारा 67 का नोटिस क्या होता है? क्या जमीन से तुरंत बेदखल किया जा सकता है? नोटिस का जवाब कैसे दिया जाए?”
यह लेख मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धारा 67 के संदर्भ में है। अलग-अलग राज्यों के राजस्व कानून और उनकी धाराएं अलग हो सकती हैं, इसलिए इसे पूरे भारत के हर राज्य पर समान रूप से लागू नहीं माना जाना चाहिए।
धारा 67 के तहत ग्राम पंचायत की संपत्ति को नुकसान, दुरुपयोग या कानून के विरुद्ध कब्जे से संबंधित कार्रवाई की व्यवस्था है। संबंधित प्राधिकारी को सूचना मिलने पर प्रक्रिया के अनुसार नोटिस और आगे की कार्रवाई हो सकती है।
▶ WhatsApp – धारा 67 प्रक्रिया की सामान्य कानूनी जानकारी प्राप्त करें
सबसे पहले समझें: धारा 67 किस प्रकार की जमीन के मामलों से जुड़ सकती है?
उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धारा 67 का संबंध मुख्य रूप से ऐसी संपत्ति से है जो ग्राम पंचायत या अन्य स्थानीय प्राधिकरण को संहिता के तहत सौंपी गई हो, तथा ऐसी स्थिति से जहां संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया हो, उसका दुरुपयोग हुआ हो या संबंधित भूमि पर कानून के प्रावधानों के विपरीत कब्जा किया गया हो।
इसलिए हर सामान्य निजी जमीन विवाद को सीधे धारा 67 का मामला नहीं माना जा सकता।
उदाहरण के तौर पर स्थिति अलग हो सकती है यदि:
- विवाद दो निजी जमीन मालिकों के बीच boundary का है।
- पारिवारिक या पैतृक संपत्ति का ownership dispute है।
- Sale deed या title को लेकर विवाद है।
- किसी व्यक्ति का दावा है कि जमीन उसकी निजी भूमि है।
- Revenue record में भूमि की प्रकृति और वास्तविक कब्जे को लेकर विवाद है।
ऐसे मामलों में facts के अनुसार अलग revenue या civil remedies लागू हो सकती हैं।
क्या आपके मामले में धारा 67 की कार्रवाई हो सकती है?
यदि आपको नोटिस मिला है या आप किसी भूमि पर कथित अवैध कब्जे की शिकायत करना चाहते हैं, तो पहले यह जांचना जरूरी है कि मामला वास्तव में किस प्रकार का है।
इन सवालों की जांच करें:
- क्या भूमि के राजस्व रिकॉर्ड उपलब्ध हैं?
- Revenue record में भूमि की category क्या दर्ज है?
- क्या भूमि Gram Panchayat/Gram Sabha या स्थानीय प्राधिकरण से संबंधित बताई जा रही है?
- क्या किसी अधिकारी ने पहले शिकायत या रिपोर्ट तैयार की है?
- क्या Lekhpal की report या अन्य राजस्व रिकॉर्ड मौजूद हैं?
- क्या पहले कोई notice, order या proceeding हुई है?
- क्या व्यक्ति के पास अपने कब्जे के समर्थन में कोई दस्तावेज या अधिकार का दावा है?
- क्या विवाद वास्तव में कब्जे का है या ownership/title का?
यही distinction बहुत महत्वपूर्ण है। गलत कानूनी remedy चुनने से समय और खर्च दोनों बढ़ सकते हैं।
▶ WhatsApp – अपने दस्तावेजों के आधार पर प्रक्रिया की सामान्य जानकारी लें
धारा 67 के तहत कार्रवाई की सामान्य कानूनी प्रक्रिया क्या हो सकती है?
धारा 67 के तहत प्रक्रिया को सरल भाषा में समझें तो मामला सामान्यतः सूचना या रिकॉर्ड से शुरू हो सकता है। संबंधित कानून के तहत Bhumi Prabandhak Samiti, अन्य संबंधित authority या Lekhpal द्वारा संबंधित अधिकारी को जानकारी दी जा सकती है।
Step 1: कथित नुकसान या गलत कब्जे की सूचना
यदि संबंधित Gram Panchayat property को नुकसान, misappropriation या भूमि पर कानून के विरुद्ध कब्जे की बात सामने आती है, तो prescribed प्रक्रिया के अनुसार संबंधित अधिकारी को जानकारी दी जा सकती है।
Step 2: Notice और जवाब देने का अवसर
यदि संबंधित अधिकारी को प्रथम दृष्टया कार्रवाई की आवश्यकता दिखाई देती है, तो संबंधित व्यक्ति को notice देकर कारण बताने का अवसर दिया जा सकता है कि उसके विरुद्ध compensation या eviction जैसी कार्रवाई क्यों न की जाए।
नोटिस को ignore करना उचित नहीं है। Notice में दिए गए आरोप, भूमि का विवरण और जवाब देने की समय-सीमा को ध्यान से पढ़ना चाहिए।
Step 3: Reply और supporting evidence
यदि व्यक्ति के पास अपने कब्जे या अधिकार के समर्थन में दस्तावेज हैं, तो applicable procedure के अनुसार उनका उपयोग किया जा सकता है। केवल मौखिक रूप से “जमीन मेरी है” कहना पर्याप्त नहीं हो सकता।
Step 4: अधिकारी द्वारा निर्णय
यदि जवाब नहीं दिया जाता या जवाब को पर्याप्त नहीं माना जाता, तो कानून के अनुसार आगे eviction और compensation से संबंधित आदेश पारित किया जा सकता है। दूसरी ओर, यदि अधिकारी यह पाता है कि व्यक्ति कथित wrongful occupation के लिए जिम्मेदार नहीं है, तो notice discharge किया जा सकता है।
इसलिए हर धारा 67 notice का परिणाम पहले से तय नहीं होता। मामला documents, revenue records, facts और applicable procedure पर निर्भर करता है।
क्या धारा 67 का नोटिस मिलते ही तुरंत बेदखली हो जाती है?
सिर्फ notice मिलना अपने आप अंतिम बेदखली आदेश नहीं होता।
धारा 67 के तहत संबंधित व्यक्ति को show-cause का अवसर दिया जा सकता है। उसके बाद facts और जवाब के आधार पर सक्षम अधिकारी आगे निर्णय लेता है।
यही कारण है कि notice मिलने के बाद घबराने या जमीन खाली करने/कोई कदम उठाने से पहले notice, revenue record और अपने दस्तावेज समझना महत्वपूर्ण है।
यदि सक्षम अधिकारी द्वारा कानून के अनुसार eviction का आदेश पारित होता है, तो आगे की कार्रवाई applicable statutory procedure के अनुसार हो सकती है।
धारा 67 का नोटिस मिलने पर तुरंत क्या करें?
यदि आपको Section 67 से संबंधित notice मिला है, तो ये practical steps उपयोगी हो सकते हैं:
1. Notice की तारीख और deadline देखें
Notice कब मिला, reply की last date क्या है और किस अधिकारी ने जारी किया है—इन details को तुरंत note करें।
2. Notice की पूरी copy सुरक्षित रखें
Original notice, envelope/receiving details और attached documents की copies सुरक्षित रखें।
3. Land details verify करें
Khasra number, Khatauni, भूमि की category और अन्य revenue records जांचें।
4. अपने कब्जे से जुड़े documents collect करें
Facts के अनुसार relevant documents में पुराने revenue records, allotment-related documents, possession-related records, maps या अन्य legally relevant papers शामिल हो सकते हैं।
5. केवल WhatsApp या मौखिक जानकारी पर भरोसा न करें
Official notice और certified/official revenue records को प्राथमिकता दें। Screenshots useful हो सकते हैं, लेकिन original documents और official records अलग महत्व रखते हैं।
▶ WhatsApp – नोटिस और आगे की प्रक्रिया के बारे में सामान्य जानकारी प्राप्त करें
धारा 67 के मामले में कौन-कौन से documents सुरक्षित रखें?
Revenue और land dispute में documents अक्सर सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उपलब्धता के अनुसार निम्न records सुरक्षित रखें:
- धारा 67 का notice और सभी annexures
- खसरा विवरण
- खतौनी या उपलब्ध revenue record
- Land map / नक्शा, जहां relevant हो
- Demarcation से संबंधित दस्तावेज, यदि उपलब्ध हों
- पूर्व में दी गई शिकायतों की copies
- Tehsil/SDM/Revenue Authority की receiving या acknowledgement
- पहले पारित आदेशों की copies
- Photographs/videos, यदि वे facts को accurately show करते हों
- Possession या अधिकार से संबंधित उपलब्ध documents
महत्वपूर्ण: किसी भी evidence या document को alter, manipulate या destroy न करें। Original records को सुरक्षित रखें और copies का proper backup रखें।
अगर तहसील या राजस्व अधिकारी कार्रवाई नहीं कर रहे हैं तो क्या किया जा सकता है?
यदि किसी व्यक्ति ने Gram Panchayat या संबंधित सार्वजनिक/स्थानीय प्राधिकरण की भूमि पर कथित गलत कब्जे की शिकायत की है लेकिन कार्रवाई नहीं हो रही, तो आगे की प्रक्रिया facts और applicable revenue law पर निर्भर कर सकती है।
स्थिति के अनुसार written representation, appropriate higher authority के समक्ष उपलब्ध remedy या अन्य statutory/legal remedy पर विचार किया जा सकता है।
लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण बात है:
हर delay का मतलब यह नहीं कि तुरंत court जाना ही सही अगला कदम है।
पहले यह समझना जरूरी है कि:
- शिकायत किस authority को दी गई?
- किस कानून के तहत कार्रवाई मांगी गई?
- क्या जरूरी documents दिए गए?
- क्या कोई order already passed है?
- क्या मामला वास्तव में Gram Panchayat land का है?
- क्या ownership/title dispute मौजूद है?
गलत forum चुनने से मामला और लंबा हो सकता है।
धारा 67 के आदेश से असहमति हो तो क्या विकल्प हो सकता है?
उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धारा 67 में Assistant Collector के संबंधित आदेश के विरुद्ध appeal का प्रावधान दिया गया है। कानून के पाठ के अनुसार appeal की समय-सीमा और forum को ध्यान से देखना आवश्यक है।
वर्तमान कानून के अनुसार उपलब्ध remedy, limitation और procedure को संबंधित order की तारीख, order की nature और applicable statutory provisions के आधार पर verify करना चाहिए। किसी भी मामले में delay होने पर limitation से संबंधित प्रश्न महत्वपूर्ण हो सकता है।
इसलिए order मिलने के बाद उसे बिना पढ़े ignore करना उचित नहीं है।
धारा 67 और निजी जमीन पर कब्जे के मामले में अंतर
यह सबसे common confusion है।
यदि आपका सवाल है:
“पड़ोसी ने मेरी निजी जमीन पर कब्जा कर लिया है”
तो मामला सामान्यतः सीधे Gram Panchayat property से संबंधित Section 67 proceeding नहीं हो सकता। ऐसे मामले में facts के अनुसार boundary verification, legal notice, injunction, possession या अन्य civil/revenue remedies relevant हो सकती हैं।
इस विषय पर हमारा detailed guide पढ़ें:
Property Encroachment by Neighbour – Legal Remedies & Civil Court Process
और यदि आपकी निजी जमीन पर कब्जा करने की कोशिश हो रही है, तो यह guide भी useful हो सकती है:
मेरी जमीन पर कब्जा हो रहा है – तुरंत क्या करें? कानूनी उपाय और प्रक्रिया
धारा 67 के मामलों में लोग कौन-सी गलतियां करते हैं?
- Notice को ignore करना
- Deadline निकल जाने देना
- Land category verify न करना
- केवल oral claims पर निर्भर रहना
- Revenue records collect न करना
- गलत अधिकारी के पास शिकायत करना
- Private land dispute और Gram Panchayat land matter को एक जैसा समझना
- Documents या evidence को preserve न करना
- केवल social media या WhatsApp advice पर legal strategy तय करना
Frequently Asked Questions
क्या धारा 67 पूरे भारत में एक जैसा कानून है?
नहीं। यह लेख विशेष रूप से उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धारा 67 के संदर्भ में है। अलग-अलग राज्यों के भूमि और राजस्व कानून अलग हो सकते हैं।
क्या Section 67 notice को ignore किया जा सकता है?
Notice को ignore करना जोखिमपूर्ण हो सकता है। Notice में दिए गए आरोप और समय-सीमा को ध्यान से समझकर applicable procedure के अनुसार जवाब देने पर विचार करना चाहिए।
क्या हर जमीन कब्जा मामला धारा 67 के तहत आता है?
नहीं। Private property boundary dispute, ownership dispute और Gram Panchayat property से जुड़े कथित wrongful occupation अलग कानूनी frameworks में आ सकते हैं।
क्या धारा 67 में जमीन से बेदखली हो सकती है?
कानून में prescribed procedure के तहत eviction से संबंधित power का प्रावधान है। लेकिन actual outcome facts, notice, reply, evidence और सक्षम authority के decision पर निर्भर करेगा।
क्या धारा 67 के आदेश के खिलाफ remedy उपलब्ध हो सकती है?
धारा 67 में संबंधित orders के विरुद्ध appeal का प्रावधान है। Applicable limitation और forum को order तथा वर्तमान कानून के अनुसार verify करना आवश्यक है।
अगर जमीन मेरी निजी property है लेकिन notice में Gram Panchayat land बताया गया है तो क्या करें?
ऐसी स्थिति में revenue records, title documents, land classification और notice के आधार को ध्यान से verify करना महत्वपूर्ण है। मामला documents और specific facts पर निर्भर करेगा।
निष्कर्ष: धारा 67 के मामले में सबसे जरूरी बात क्या है?
धारा 67 का मामला केवल “कब्जा हटाओ” या “नोटिस का जवाब दो” जितना सरल नहीं होता। सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि भूमि की कानूनी category क्या है और alleged occupation किस आधार पर बताया जा रहा है।
Notice + Revenue Records + Land Details + Previous Orders + Actual Possession Facts — इन सभी को एक साथ देखकर ही सही procedural direction समझी जा सकती है।
यदि आपको धारा 67 का notice मिला है, या Gram Panchayat property से जुड़े alleged encroachment मामले में प्रक्रिया समझनी है, तो समय-सीमा और original documents को नजरअंदाज न करें।
▶ WhatsApp – धारा 67 मामले की प्रक्रिया पर सामान्य कानूनी मार्गदर्शन प्राप्त करें
Read Also
- Property Encroachment by Neighbour – Legal Remedies & Civil Court Process
- मेरी जमीन पर कब्जा हो रहा है – तुरंत क्या करें? कानूनी उपाय
- Cheque Bounce होने पर पैसे कैसे Recover करें?
- WhatsApp Messages Court में Evidence बनते हैं क्या?
Image used for illustration purposes only.
Need legal guidance? You may choose to connect for general consultation and information.
Disclaimer: This article is for general legal information and awareness purposes only. It does not constitute legal advice or solicitation. Communication is purely informational, in compliance with Bar Council of India Rule 36.





















