तहसीलदार न्यायालय में नामांतरण में आपत्ति कैसे दाखिल करें? – उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता के अंतर्गत पूर्ण मार्गदर्शन
यह लेख The Legal Warning India द्वारा प्रकाशित किया गया है और इसे Advocate Uday Singh ने लिखा है।
जब किसी जमीन का नामांतरण (Mutation) तहसील में चल रहा हो और आपको लगता है कि
रजिस्ट्री गलत है, फर्जी है, या आपके अधिकारों का उल्लंघन कर रही है —
तो आप तहसीलदार न्यायालय में आपत्ति (Objection) दाखिल कर सकते हैं।
अक्सर लोग पूछते हैं:
“नामांतरण में आपत्ति कैसे डालें? क्या केवल आवेदन से काम चलेगा?”
इस लेख में हम उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता (UP Revenue Code) के अनुसार पूरी प्रक्रिया समझेंगे:
- नामांतरण में आपत्ति कब डाली जा सकती है
- कानूनी आधार क्या होते हैं
- तहसीलदार न्यायालय में आपत्ति का प्रारूप
- सुनवाई की प्रक्रिया
- गलत आदेश होने पर आगे का उपाय
नामांतरण क्या है? (संक्षेप में)
नामांतरण का अर्थ है राजस्व अभिलेख (खतौनी) में नए व्यक्ति का नाम दर्ज करना।
यदि आपको नामांतरण आवेदन प्रक्रिया समझनी है, तो यह लेख भी पढ़ें:
नामांतरण (Mutation) के लिए तहसीलदार को आवेदन – पूरा प्रारूप
नामांतरण में आपत्ति कब डाली जा सकती है?
- रजिस्ट्री फर्जी या दबाव में हुई हो
- विक्रेता असली मालिक न हो
- संपत्ति विवादित हो
- वसीयत विवादित हो
- साझा संपत्ति में बिना सहमति बिक्री हुई हो
UP Revenue Code के तहत तहसीलदार सुनवाई कर सकता है।
आपत्ति दाखिल करने की प्रक्रिया
Step 1: नोटिस या इश्तिहार की जानकारी लें
नामांतरण आवेदन दर्ज होने के बाद सार्वजनिक सूचना जारी होती है।
Step 2: समय सीमा के भीतर लिखित आपत्ति दें
आमतौर पर 15–30 दिन का समय दिया जाता है।
Step 3: दस्तावेज संलग्न करें
- पुरानी खतौनी
- स्वामित्व दस्तावेज
- वसीयत / उत्तराधिकार प्रमाण
- न्यायालय आदेश (यदि कोई हो)
तहसीलदार न्यायालय में आपत्ति का प्रारूप (Sample Format)
माननीय तहसीलदार न्यायालय, तहसील ________, जनपद ________ वाद संख्या: _________ विषय: नामांतरण प्रकरण में आपत्ति प्रार्थना पत्र महोदय, सविनय निवेदन है कि वादी द्वारा प्रस्तुत नामांतरण आवेदन मेरे वैध अधिकारों के विपरीत है। उक्त भूमि खसरा संख्या ________, ग्राम ________, क्षेत्रफल ________ में प्रार्थी का वैध स्वामित्व / हिस्सा है। प्रस्तुत रजिस्ट्री दिनांक ________ विवादित / फर्जी / दबाव में की गई है। अतः निवेदन है कि नामांतरण प्रकरण में प्रार्थी की आपत्ति स्वीकार कर सुनवाई की जाए और उचित आदेश पारित किया जाए। दिनांक: नाम: पता: हस्ताक्षर:
सुनवाई की प्रक्रिया
- दोनों पक्षों को सुनवाई का अवसर
- लेखपाल की रिपोर्ट
- दस्तावेजी जांच
- तहसीलदार का आदेश
ध्यान दें: नामांतरण का आदेश स्वामित्व तय नहीं करता,
बल्कि रिकॉर्ड अपडेट करता है।
गलत आदेश होने पर क्या करें?
- SDM के समक्ष अपील
- राजस्व न्यायालय में पुनरीक्षण
- उचित मामलों में उच्च न्यायालय
आम गलतियाँ जो लोग करते हैं
- समय सीमा चूक जाना
- बिना दस्तावेज आपत्ति देना
- सुनवाई में उपस्थित न होना
यह लेख केवल सामान्य कानूनी जानकारी और जागरूकता के उद्देश्य से है। यह किसी प्रकार की कानूनी सलाह या सॉलिसिटेशन नहीं है। यह Bar Council of India Rule 36 के अनुरूप है।





















