This article is published by The Legal Warning India and written by Advocate Uday Singh.
दहेज उत्पीड़न केस में पूरे परिवार का नाम FIR में डाल दिया गया – कैसे हटवाएं?
भारत में दहेज उत्पीड़न (Dowry Harassment) के मामलों में यह अक्सर देखा जाता है कि
पति के साथ-साथ पूरे परिवार – माता-पिता, भाई-बहन, बुज़ुर्ग रिश्तेदारों तक का नाम FIR में डाल दिया जाता है।
कई बार यह FIR कानूनी दबाव बनाने, समझौता कराने या बदले की भावना से भी दर्ज कराई जाती है।
ऐसे मामलों में सबसे बड़ा सवाल होता है:
- क्या पूरे परिवार को जेल हो सकती है?
- क्या FIR से नाम हटवाया जा सकता है?
- कानून ऐसे मामलों में क्या सुरक्षा देता है?
यह लेख भारतीय कानून, सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश और व्यावहारिक अदालत प्रक्रिया पर आधारित है।
दहेज उत्पीड़न (498A) का उद्देश्य क्या है?
दहेज उत्पीड़न कानून महिलाओं को वास्तविक अत्याचार से बचाने के लिए बनाया गया है।
लेकिन अदालतों ने यह भी माना है कि:
- कई मामलों में कानून का दुरुपयोग हुआ है
- बिना ठोस आरोपों के पूरे परिवार को घसीटा गया है
कानून सुरक्षा के लिए है, प्रताड़ना के लिए नहीं।
पूरे परिवार का नाम FIR में डालना कब गलत माना जाता है?
यदि FIR में:
- सभी रिश्तेदारों पर एक-जैसे आरोप हों
- कोई specific भूमिका या घटना न लिखी हो
- दूर रहने वाले या बुज़ुर्ग लोगों को भी आरोपी बनाया गया हो
तो अदालतें इसे Over-implication मानती हैं।
क्या पुलिस सभी को तुरंत गिरफ्तार कर सकती है?
नहीं।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार:
- 498A में automatic arrest नहीं होनी चाहिए
- हर आरोपी की भूमिका अलग-अलग देखी जानी चाहिए
गिरफ्तारी से पहले जांच और संतुष्टि जरूरी है।
पूरे परिवार का नाम FIR से कैसे हटवाया जा सकता है?
1️⃣ हाई कोर्ट में FIR Quashing
अगर आरोप झूठे या सामान्य प्रकृति के हों, तो
हाई कोर्ट में FIR रद्द (quash) कराने की अर्जी दी जा सकती है।
2️⃣ Anticipatory Bail (अग्रिम जमानत)
गिरफ्तारी से बचने के लिए परिवार के सदस्य अग्रिम जमानत ले सकते हैं।
3️⃣ Police Investigation के दौरान नाम हटना
जांच में यदि किसी सदस्य की भूमिका नहीं पाई जाती,
तो charge-sheet में उसका नाम हट सकता है।
कौन-से सबूत परिवार को बचाने में मदद करते हैं?
- अलग निवास का प्रमाण
- Medical / age related documents
- WhatsApp / messages जो झूठे आरोप दिखाएं
- पूर्व में कोई शिकायत न होना
सिर्फ नाम होना दोष साबित नहीं करता।
पीड़ित पक्ष (महिला) की शिकायत पूरी तरह गलत हो तो?
यदि यह साबित हो जाए कि:
- झूठे आरोप लगाए गए
- दबाव बनाने के लिए FIR कराई गई
तो आगे चलकर कानूनी कार्रवाई संभव होती है।
सबसे बड़ी गलती जो परिवार करता है
- डर के कारण चुप रहना
- पुलिस को बिना सलाह बयान देना
- मान लेना कि FIR = दोष सिद्ध
FIR सिर्फ आरोप है, फैसला नहीं।
निष्कर्ष
दहेज उत्पीड़न केस में पूरे परिवार का नाम डालना अपने-आप में सजा नहीं है।
कानून और अदालतें यह देखती हैं कि
किसकी क्या भूमिका थी — और किसे सिर्फ दबाव के लिए फँसाया गया।
सही समय पर सही कानूनी कदम
पूरे परिवार को अनावश्यक उत्पीड़न से बचा सकता है।
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Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य कानूनी जानकारी और जन-जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित किया गया है। यह किसी प्रकार की कानूनी सलाह या सॉलिसिटेशन नहीं है। यह संचार Bar Council of India Rule 36 के अनुरूप है।





















