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झूठे हलफनामे पर केस कैसे करें? कोर्ट में झूठ बोलने पर कानूनी कार्रवाई पूरी जानकारी

यह लेख The Legal Warning India द्वारा प्रकाशित किया गया है और Advocate Uday Singh द्वारा लिखा गया है।

सिविल और पारिवारिक मामलों में यह एक आम समस्या बन चुकी है कि पक्षकार अदालत में झूठा हलफनामा (False Affidavit) दाखिल कर देते हैं।
कई बार लोग सोचते हैं कि कोर्ट में झूठ बोलने पर कोई सजा नहीं होती, लेकिन यह धारणा पूरी तरह गलत है।

अक्सर पूछा जाने वाला सवाल है:

“अगर सामने वाला कोर्ट में झूठा हलफनामा देता है, तो उस पर केस कैसे किया जा सकता है?”

इस लेख में हम विस्तार से समझेंगे:

  • झूठा हलफनामा क्या होता है
  • झूठा हलफनामा देना अपराध क्यों है
  • कौन-सी धाराओं में केस बनता है
  • सीधे FIR क्यों नहीं होती
  • सही कानूनी प्रक्रिया क्या है

झूठा हलफनामा (False Affidavit) क्या होता है?

जब कोई व्यक्ति अदालत में:

  • जानबूझकर गलत तथ्य लिखकर हलफनामा देता है
  • सच जानते हुए झूठी जानकारी देता है
  • महत्वपूर्ण तथ्य छुपाता है
  • गलत दस्तावेजों के आधार पर शपथपत्र दाखिल करता है

तो उसे झूठा हलफनामा कहा जाता है।

यह केवल नैतिक गलती नहीं, बल्कि आपराधिक कृत्य है।


कोर्ट में झूठा हलफनामा देना अपराध क्यों है?

अदालत का पूरा सिस्टम सत्य और विश्वास पर आधारित होता है।
जब कोई व्यक्ति शपथ लेकर झूठ बोलता है, तो वह:

  • न्यायिक प्रक्रिया को गुमराह करता है
  • कोर्ट का समय बर्बाद करता है
  • दूसरे पक्ष को नुकसान पहुँचाता है

इसीलिए कानून में इसे Perjury (झूठी गवाही) माना गया है।


झूठे हलफनामे पर कौन-सी धाराएं लगती हैं?

झूठे हलफनामे पर आमतौर पर ये कानूनी प्रावधान लागू होते हैं:

  • IPC की धाराएं (झूठी गवाही / झूठा बयान)
  • अदालत की अवमानना (Contempt of Court)
  • कोर्ट प्रक्रिया का दुरुपयोग

लेकिन ध्यान रखें:
इन धाराओं में सीधे FIR दर्ज नहीं होती।


क्या झूठे हलफनामे पर सीधे FIR हो सकती है?

नहीं।

कानून के अनुसार, अदालत में दिए गए झूठे बयान या हलफनामे पर:

  • सीधे थाने में FIR दर्ज नहीं की जा सकती
  • पहले अदालत की अनुमति जरूरी होती है

इसका उद्देश्य यह है कि कोई भी व्यक्ति बदले की भावना से FIR न कर सके।


झूठे हलफनामे पर केस करने की सही प्रक्रिया

Step 1: झूठ को रिकॉर्ड में साबित करें

  • दस्तावेजों से विरोधाभास दिखाएं
  • पहले के रिकॉर्ड और बयान सामने रखें

Step 2: अदालत में उचित आवेदन दें

कोर्ट से यह निवेदन किया जाता है कि सामने वाले ने झूठा हलफनामा दिया है।

Step 3: कोर्ट की संतुष्टि जरूरी

अगर कोर्ट मान लेती है कि:

  • झूठ जानबूझकर बोला गया
  • मामला न्याय को प्रभावित करता है

तो कोर्ट स्वयं आपराधिक कार्रवाई का आदेश दे सकती है।


झूठा हलफनामा और फर्जी सिविल केस का संबंध

अक्सर झूठा हलफनामा फर्जी सिविल केस का हिस्सा होता है।
कोर्ट जब यह देखती है कि केस झूठे आधार पर चल रहा है, तो:

  • केस खारिज हो सकता है
  • खर्च (Costs) लगाया जा सकता है
  • आपराधिक कार्रवाई की सिफारिश हो सकती है

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लोग कौन-सी गलतियाँ करते हैं?

  • सीधे थाने में FIR कराने की कोशिश
  • कोर्ट में बिना सबूत आरोप लगाना
  • भावनात्मक तरीके से आवेदन देना

गलत कदम से आपका ही केस कमजोर हो सकता है।


निष्कर्ष

झूठे हलफनामे पर केस करना संभव है, लेकिन:

  • सही प्रक्रिया से
  • सही समय पर
  • मजबूत सबूतों के साथ

सबसे सुरक्षित तरीका है –
पहले कोर्ट में झूठ साबित करें, फिर आपराधिक कार्रवाई का रास्ता अपनाएं।


यह लेख केवल सामान्य कानूनी जानकारी और जागरूकता के लिए है। यह किसी भी प्रकार की कानूनी सलाह या विज्ञापन नहीं है। यह Bar Council of India Rule 36 के अनुरूप है।