बिना लिखित एग्रीमेंट Sub-Contract का काम करवा लिया – अब पैसा कैसे निकाले? (भारत)
यह लेख The Legal Warning India द्वारा प्रकाशित किया गया है और इसे एडवोकेट उदय सिंह द्वारा लिखा गया है।
भारत में हज़ारों sub-contractors, labour thekedars, छोटे ठेकेदार और MSME vendors बिना किसी लिखित एग्रीमेंट के काम करते हैं।
Site पर मौखिक बात होती है, WhatsApp पर instruction आता है, काम पूरा करवा लिया जाता है — लेकिन जब payment का समय आता है, तो जवाब मिलता है:
“कोई agreement नहीं है, इसलिए payment नहीं बनेगी।”
यही सबसे बड़ा डर और confusion होता है:
“बिना agreement काम कर दिया, क्या अब कानूनी तौर पर पैसा निकल सकता है?”
इस लेख में हम आपको बिल्कुल साफ़ और practical तरीके से बताएँगे कि बिना लिखित agreement के भी sub-contractor अपना पैसा कैसे legally recover कर सकता है।
क्या बिना लिखित Agreement के Contract वैध होता है?
हाँ। भारतीय कानून के अनुसार contract हमेशा लिखित होना ज़रूरी नहीं है।
Contract हो सकता है:
- लिखित (Written)
- मौखिक (Oral)
- व्यवहार से साबित (Implied)
अगर काम दिया गया, काम किया गया और सामने वाले को फायदा मिला, तो कानून उसे valid contract मानता है।
बिना Agreement Sub-Contract के Case में Payment क्यों रोका जाता है?
- Sub-contractor को कमजोर समझना
- जानबूझकर दबाव बनाना
- Company का cash flow issue
- Legal awareness की कमी का फायदा
- “No agreement” को बहाना बनाना
लेकिन कोर्ट ऐसे बहानों को आँख बंद करके स्वीकार नहीं करती।
बिना Agreement Payment Recover करने के लिए कौन-से Proof काम आते हैं?
कोर्ट पूरे transaction को देखती है, सिर्फ agreement नहीं।
Strong Proofs:
- WhatsApp / Email instructions
- Work completion photos / videos
- Site entry / gate pass records
- Running bills / invoices
- Measurement book (MB)
- Labour attendance / muster roll
- Partial payments (अगर पहले मिले हों)
- Site engineer / supervisor की गवाही
काम का actual execution सबसे बड़ा सबूत होता है।
सबसे पहला कानूनी कदम – Legal Notice
ऐसे मामलों में legal notice सबसे powerful और safe step होता है।
एक सही legal notice में:
- काम का पूरा विवरण
- Payment amount
- कब और कैसे काम हुआ
- Payment की समय सीमा
- Court action की चेतावनी
कई बार सिर्फ notice मिलने पर ही payment release हो जाती है।
अगर Legal Notice के बाद भी पैसा न मिले तो?
तब sub-contractor के पास ये legal options होते हैं:
1. Civil Suit (पैसा वसूली का मुकदमा)
Outstanding amount + interest + damages का दावा किया जा सकता है।
2. Commercial Court (High Value Work)
अगर काम की value ज़्यादा है, तो commercial court में मामला जाता है।
3. MSME Remedies (अगर MSME registration है)
MSME registered contractors को अतिरिक्त कानूनी protection मिलता है।
कोर्ट बिना Agreement के Case में क्या देखती है?
- क्या काम हुआ?
- क्या सामने वाले ने काम accept किया?
- क्या objections बाद में बनाए गए?
- क्या payment रोकना unfair है?
कोर्ट unjust enrichment को allow नहीं करती — यानी काम लेकर पैसा न देना।
Sub-Contractors कौन-सी गलतियाँ करते हैं?
- सिर्फ मौखिक भरोसा
- Proof सुरक्षित न रखना
- Legal notice देर से भेजना
- डर की वजह से चुप रहना
भविष्य में ऐसे नुकसान से कैसे बचें?
- कम से कम WhatsApp/email confirmation रखें
- काम के दौरान फोटो/video लें
- Running bill समय पर दें
- Payment delay पर तुरंत legal action लें
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q. बिना agreement कोर्ट में केस जीत सकते हैं?
हाँ, अगर काम और acceptance साबित हो जाए।
Q. WhatsApp message valid proof है?
हाँ, context और continuity के साथ।
Q. Legal notice ज़रूरी है?
Mandatory नहीं, लेकिन बहुत ज़रूरी है।
यह लेख केवल सामान्य कानूनी जानकारी और जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है। यह किसी भी प्रकार की कानूनी सलाह या याचना नहीं है। यह लेख बार काउंसिल ऑफ इंडिया नियम 36 के अनुरूप है।





















