This article is published by The Legal Warning India and written by Advocate Uday Singh.
IGRS UP Portal Par Galat Report Lagakar Shikayat Nistarit Kar Di? Ab Kya Kare – Pura Kanooni Vishleshan
समस्या: IGRS UP Portal पर शिकायत की, लेकिन “गलत रिपोर्ट” लगाकर मामला निस्तारित?
उत्तर प्रदेश में IGRS (Integrated Grievance Redressal System) Portal पर लाखों नागरिक अपनी शिकायतें दर्ज करते हैं। लेकिन कई मामलों में देखा गया है कि:
- बिना उचित जांच के रिपोर्ट लगा दी जाती है
- तथ्यों की अनदेखी कर दी जाती है
- आवेदन को “निस्तारित” दिखा दिया जाता है
- आवेदक की आपत्ति दर्ज नहीं की जाती
ऐसी स्थिति में नागरिकों को लगता है कि उनकी शिकायत “कागज़ी कार्रवाई” में दबा दी गई।
IGRS Portal Kya Hai?
IGRS UP Portal एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है जहां:
- राजस्व विवाद
- जमीन/खसरा/खतौनी संबंधी शिकायतें
- पुलिस/प्रशासनिक लापरवाही
- अवैध कब्जा
- भ्रष्टाचार शिकायतें
जैसे मामलों में शिकायत दर्ज की जाती है।
गलत रिपोर्ट लगाकर निस्तारण – कानूनी दृष्टि से क्या है?
यदि किसी अधिकारी ने:
- बिना जांच गलत तथ्य लिखे
- झूठी रिपोर्ट लगाई
- आवेदन को मनमाने ढंग से बंद किया
तो यह केवल प्रशासनिक गलती नहीं, बल्कि संभावित रूप से:
- कर्तव्य में लापरवाही
- प्रशासनिक दुरुपयोग
- न्यायिक समीक्षा योग्य कार्य
हो सकता है।
तुरंत क्या करें? (Practical Steps)
1️⃣ Re-Open / Feedback Option का उपयोग करें
IGRS Portal पर “असंतुष्ट” या “Feedback” का विकल्प उपलब्ध होता है।
आप:
- स्पष्ट लिखें कि रिपोर्ट तथ्यात्मक रूप से गलत है
- साक्ष्य (Documents / Photos) अपलोड करें
- बिंदुवार आपत्ति दर्ज करें
2️⃣ उच्च अधिकारी को पुनः शिकायत करें
यदि मामला तहसील स्तर पर बंद हुआ है, तो:
- SDM / ADM को प्रार्थना पत्र दें
- DM स्तर पर पुनर्विचार की मांग करें
3️⃣ RTI लगाएं
RTI Act, 2005 के तहत:
- पूछें कि जांच किस आधार पर की गई?
- कौन अधिकारी जिम्मेदार था?
- जांच रिपोर्ट की प्रमाणित प्रति मांगे
4️⃣ उच्च न्यायालय में रिट याचिका
यदि प्रशासन बार-बार गलत निस्तारण कर रहा है, तो
Article 226 के तहत हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की जा सकती है।
कब मामला गंभीर माना जाएगा?
- भूमि विवाद में जानबूझकर गलत रिपोर्ट
- अवैध कब्जा को संरक्षण देना
- भ्रष्टाचार छुपाने हेतु फर्जी निस्तारण
- महिला/SC-ST/वरिष्ठ नागरिक मामलों में लापरवाही
क्या अधिकारी पर कार्रवाई हो सकती है?
यदि यह सिद्ध हो जाए कि रिपोर्ट जानबूझकर गलत लगाई गई:
- विभागीय जांच संभव है
- शासन स्तर पर शिकायत हो सकती है
- कभी-कभी IPC / BNS की धाराएँ भी लग सकती हैं (यदि फर्जी दस्तावेज़ या कूटरचना हो)
अगर अनदेखा किया तो क्या होगा?
यदि नागरिक चुप रह जाए:
- रिकॉर्ड में मामला “निस्तारित” दिखेगा
- भविष्य में कानूनी दावा कमजोर होगा
- भूमि/प्रशासनिक अधिकार प्रभावित हो सकते हैं
निष्कर्ष
IGRS Portal पर गलत रिपोर्ट लगाकर शिकायत बंद कर देना अंतिम सत्य नहीं है।
नागरिक के पास:
- पुनर्विचार का अधिकार
- RTI का अधिकार
- उच्च अधिकारी को अपील
- हाईकोर्ट की संवैधानिक सुरक्षा
कानून नागरिक को असहाय नहीं छोड़ता – लेकिन समय पर सही कदम उठाना आवश्यक है।





















