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पति की सैलरी ज़्यादा है और पत्नी भी कमाती है – फिर भी क्या पति को मेंटेनेंस देना होगा?

This article is published by The Legal Warning India and written by Advocate Uday Singh.

यह लेख सामान्य कानूनी जानकारी और जन-जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है।

आम स्थिति जिसे लोग समझ नहीं पाते

आजकल बहुत से मामलों में यह स्थिति देखने को मिलती है:

  • पति नौकरी करता है और उसकी सैलरी अच्छी है
  • पत्नी भी नौकरी करती है, लेकिन उसकी सैलरी पति से कम है
  • पति–पत्नी में विवाद हो गया
  • पत्नी ने कोर्ट में मेंटेनेंस (भरण-पोषण) की मांग कर दी

अब सवाल उठता है:

👉 जब पत्नी खुद कमा रही है, तो क्या पति को फिर भी मेंटेनेंस देना पड़ेगा?

मेंटेनेंस क़ानून का मूल सिद्धांत

भारतीय मेंटेनेंस क़ानून यह नहीं कहता कि:

“अगर पत्नी कमाती है तो उसे मेंटेनेंस नहीं मिलेगा।”

असल में कोर्ट यह देखती है:

  • दोनों की आय में कितना अंतर है
  • शादी के दौरान जीवन स्तर (Standard of Living) क्या था
  • क्या पत्नी की आय से उसका सम्मानजनक जीवन संभव है

पत्नी का कमाना ≠ मेंटेनेंस का अंत

यह सबसे बड़ा भ्रम है।

सिर्फ इस आधार पर कि पत्नी नौकरी करती है, मेंटेनेंस अपने आप ख़त्म नहीं हो जाता।

अगर:

  • पत्नी की आय बहुत कम है
  • पति की आय कहीं ज़्यादा है
  • पति का जीवन स्तर बेहतर है

तो कोर्ट आंशिक या संतुलनात्मक मेंटेनेंस देने का आदेश दे सकती है।

कोर्ट क्या-क्या फैक्टर देखती है?

  • पति और पत्नी की मासिक आय
  • रहने, खाने, मेडिकल और अन्य खर्च
  • शादी के दौरान का रहन-सहन
  • पत्नी पर बच्चों या माता-पिता की ज़िम्मेदारी

मेंटेनेंस का उद्देश्य है:

“पत्नी को पति के समान जीवन स्तर के क़रीब रखना।”

क्या पति पूरी तरह बच सकता है?

कुछ परिस्थितियों में मेंटेनेंस नहीं भी लग सकता है, जैसे:

  • पत्नी की आय पर्याप्त और स्थिर है
  • पत्नी पति के बराबर या उससे ज़्यादा कमाती है
  • पत्नी स्वतंत्र रूप से सम्मानजनक जीवन जी रही है

लेकिन यह हर केस में अलग-अलग तय होता है।

मेंटेनेंस का प्रकार भी मायने रखता है

  • Interim Maintenance – केस चलते समय
  • Permanent Alimony – तलाक़ के बाद

कई बार केस के दौरान अंतरिम मेंटेनेंस दी जाती है, लेकिन अंतिम आदेश में उसे घटा या समाप्त किया जा सकता है।

अगर पति मेंटेनेंस नहीं दे पाए तो?

अगर कोर्ट ने मेंटेनेंस तय कर दी और पति ने भुगतान नहीं किया, तो आगे की प्रक्रिया अलग होती है।

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निष्कर्ष (Conclusion)

अगर पति की सैलरी पत्नी से ज़्यादा है और पत्नी कमाती भी है, तब भी:

  • मेंटेनेंस पूरी तरह अपने आप ख़त्म नहीं होती
  • कोर्ट आय के अंतर और जीवन स्तर को देखती है
  • ज़रूरत पड़ने पर आंशिक मेंटेनेंस लग सकती है

मेंटेनेंस का उद्देश्य समानता और गरिमा बनाए रखना है, दंड देना नहीं।


This article is for general legal information and awareness purposes only. It does not constitute legal advice or solicitation. Communication is purely informational, in compliance with Bar Council of India Rule 36.

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