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Advocate को Toll Tax क्यों नहीं देना चाहिए? | Legal Analysis



Advocate को Toll Tax क्यों नहीं देना चाहिए? – एक विस्तृत कानूनी विश्लेषण


This article is published by The Legal Warning India and written by Advocate Uday Singh.
Communication is purely informational and not an advertisement.


भूमिका (Introduction)

देशभर में टोल प्लाज़ा पर अधिवक्ताओं (Advocates) के साथ होने वाले विवाद लगातार सामने आ रहे हैं।
मुख्य प्रश्न यह है कि क्या Advocate को Toll Tax देना चाहिए या न्यायिक कर्तव्यों के कारण उन्हें इससे छूट मिलनी चाहिए।
यह लेख इस विषय पर संवैधानिक, वैधानिक और न्यायिक दृष्टिकोण से गहन विश्लेषण प्रस्तुत करता है।

1. Toll Tax का उद्देश्य क्या है?

Toll Tax मुख्य रूप से सड़क निर्माण, रख-रखाव और संचालन की लागत वसूलने के लिए लगाया जाता है।
यह शुल्क आमतौर पर व्यावसायिक वाहनों और सामान्य यात्रियों से लिया जाता है।
परंतु Advocate की यात्रा केवल व्यक्तिगत नहीं बल्कि न्यायिक कर्तव्य से जुड़ी होती है।

2. Advocate: केवल पेशेवर नहीं, Court का Officer

Advocate न्याय प्रणाली का अभिन्न अंग है। वह केवल एक निजी पेशेवर नहीं बल्कि Court का Officer होता है।
न्यायालयों ने समय-समय पर माना है कि Advocate की भूमिका न्याय के प्रशासन से सीधे जुड़ी होती है।

3. Advocates Act, 1961 का दृष्टिकोण

Advocates Act, 1961 अधिवक्ताओं को न्यायालयों में स्वतंत्र और निर्बाध रूप से कार्य करने का अधिकार देता है।
यदि Advocate को टोल प्लाज़ा पर रोका जाए या अनावश्यक शुल्क लिया जाए, तो यह न्यायिक कार्य में बाधा उत्पन्न कर सकता है।

4. संवैधानिक आधार (Constitutional Perspective)

Article 19(1)(g) – Profession की स्वतंत्रता

संविधान का अनुच्छेद 19(1)(g) प्रत्येक नागरिक को अपने पेशे को स्वतंत्र रूप से करने का अधिकार देता है।
Advocate के लिए Court, Jail, Police Station और Client Meeting तक समय पर पहुँचना अनिवार्य है।

Article 21 – न्याय तक पहुँच (Access to Justice)

यदि Advocate टोल पर अनावश्यक रूप से रोका जाता है और वह समय पर न्यायालय नहीं पहुँच पाता,
तो इससे Client के Article 21 के अधिकारों का उल्लंघन होता है।

5. न्यायिक रुझान (Judicial Trend)

विभिन्न High Courts में इस मुद्दे पर याचिकाएँ दायर की गई हैं।
हालाँकि अभी तक कोई अखिल भारतीय (Pan-India) अधिसूचना नहीं है,
परंतु Courts ने Advocate की भूमिका को देखते हुए नीति निर्धारण की आवश्यकता पर बल दिया है।

6. Ground Reality: विवाद क्यों होते हैं?

  • टोल स्टाफ द्वारा Advocate ID स्वीकार न करना
  • स्पष्ट सरकारी निर्देशों का अभाव
  • कई मामलों में बहस, दुर्व्यवहार और FIR तक की स्थिति

7. Bar Council और Advocate Associations का दृष्टिकोण

देशभर की Bar Associations का मत है कि Advocate कोई VIP नहीं,
बल्कि न्याय प्रणाली का अनिवार्य अंग है। Court duty के दौरान Toll Tax लेना अनुचित है।

8. संतुलित दृष्टिकोण (Balanced View)

यह भी सत्य है कि बिना स्पष्ट सरकारी आदेश के Toll staff अपने स्तर पर छूट नहीं दे सकता।
इसलिए समाधान टकराव नहीं बल्कि नीति निर्माण (Policy Framework) है।

9. कानूनी और व्यावहारिक समाधान

  • Advocates के लिए Uniform National Policy
  • Bar Council ID आधारित e-pass / fast-track exemption
  • Toll staff का sensitization
  • आवश्यक होने पर High Court में PIL

10. निष्कर्ष (Conclusion)

Advocate को Toll Tax से छूट कोई विशेषाधिकार नहीं,
बल्कि न्यायिक व्यवस्था के सुचारू संचालन की आवश्यकता है।
जब तक स्पष्ट नीति नहीं बनती, इस विषय पर शांतिपूर्ण और कानूनी तरीके से ही समाधान खोजा